Strengthening of Panchayati Raj Institutions
panchayati raj institutions | पंचायती राज संस्थाओं की मजबूती
पंचायती राज व्यवस्था ग्रामीण भारत की स्थानीय स्वशासन प्रणाली है. स्वरूप चाहे जो हो, लेकिन मुगल काल को छोड़, हर युग में शासन की यह प्रणाली यहां जीवित रही है. वर्तमान भारतीय शासन प्रणाली में स्थानीय निकाय व शासन को महत्वपूर्ण आधार माना गया है. अथर्ववेद में राष्ट्र की व्याख्या है. जैन ग्रंथों में लोकतंत्र शब्द का उल्लेख मिलता है. वैदिक काल में स्थानीय स्वशासन वर्तमान की भांति नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में विभाजित था. रामायण व महाभारत कालीन साहित्य में भी सभा, समिति तथा गांवों का उल्लेख है. मनुस्मृति के अनुसार गांव का अधिकारी ग्रामिक कहलाता था, जिसका कार्य कर-संचयन था. | Panchayati Raj Institutions
मौर्य कालीन प्रामाणिक साहित्य में भी ग्राम स्वराज की चर्चा है. गुप्त काल में नगर के अधिकारी को नगरपति एवं ग्राम के अधिकारी को ग्रामिक कहा जाता था. राजपूत युग में भी प्रशासन की मूल इकाई ग्राम ही था. सल्तनत काल में शासन का स्वरूप भारतीय नहीं रहा. तब राजा के द्वारा नियुक्त सैन्य अधिकारी प्रशासन की जिम्मेदारी संभालने लगे. मुगलकालीन भारत में नगर प्रशासन की जिम्मेदारी के लिए नगर कोतवाल की नियुक्ति होती थी. कोतवाल मुस्लिम धार्मिक नेताओं से राय जरूर लेता था, लेकिन वह राजा के प्रति उत्तरदायी होता था, न कि प्रजा के प्रति. भारत में आधुनिक स्थानीय स्वशासन का जनक ब्रिटिश अधिकारी लॉर्ड रिपन को माना जाता है. वर्ष 1882 में उन्होंने स्थानीय स्वशासन संबंधी प्रस्ताव दिया. साल 1919 के भारत शासन अधिनियम के तहत प्रांतों में दोहरे शासन की व्यवस्था की गयी तथा स्थानीय स्वशासन को हस्तांतरित विषयों की सूची में रखा गया. स्वतंत्रता के पश्चात 1957 में योजना आयोग (अब नीति आयोग) द्वारा सामुदायिक विकास कार्यक्रम (1952) और राष्ट्रीय विस्तार सेवा कार्यक्रम (1953) के अध्ययन के लिए ‘बलवंत राय मेहता समिति’ का गठन किया गया. |
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झारखंड जैसे आदिवासी बाहुल्य राज्यों में पंचायती राज के साथ एक और समस्या है. वर्ष 1996 में पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) विधेयक यानी पेसा कानून पास हो गया, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया है. देश की कुल जनसंख्या का 10 प्रतिशत आदिवासी समुदाय है. पेसा कानून का मूल उद्देश्य यह था कि केंद्रीय कानून में जनजातियों की स्वायत्तता के बिंदु स्पष्ट कर दिये जाएं, जिनके उल्लंघन की शक्ति राज्यों के पास न हो. वर्तमान में 10 राज्यों (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, झारखंड, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और राजस्थान) में यह अधिनियम लागू होता है, लेकिन इसे पूर्ण रूप से लागू ही नहीं किया गया है. | Panchayati Raj Institutions
राज्य सरकारें अपने अधिकार में कोई हस्तक्षेप नहीं चाहती हैं. यही कारण है कि ऐसे कानून बनने के बाद भी पंचायत को शक्ति उपलब्ध नहीं हो पायी है. लोकतंत्र का अर्थ होता है शासन व सत्ता का विकेंद्रीकरण. पंचायती शासन प्रणाली उसका सबसे बढ़िया स्वरूप है. यदि लोकतंत्र को मजबूत करना है और शासन में सबकी भागीदारी सुनिश्चित करनी है, तो पंचायती राज व्यवस्था को प्रभावी बनाना होगा. | Panchayati Raj Institutions
